JHARKHAND

झारखण्ड को नहीं मिल पा रहा कोयला उत्पादन के लिए पर्याप्त विस्फोटक, रूस-यूक्रेन युद्ध है वजह

रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के कारण भारत स्थित कोयला कंपनियों को विस्फोटक (एक्सप्लोसिव) की आपूर्ति काफी हद तक प्रभावित हुई है। पहले से विसफोटक की कमी झेल रहीं कोयला कंपनियों को रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण आपूर्ति पर बहुत ज्यादा असर हो रहा है।

कोयला मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार रूस ने अमोनियम नाइट्रेट (एएन) के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। विस्फोटक बनाने में अमोनियम नाइट्रेट सबसे महत्वपूर्ण है। निर्यात पर प्रतिबंध से विस्फोटक बनाने वाली कंपनियां प्रभावित हुई हैं। इस वजह से कोयला कंपनियों में विस्फोटक की आपूर्ति पर असर पड़ा है। अमोनियम नाइट्रेट का रूस विश्व में बड़ा निर्यातक है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कोयले के सुचारू उत्पादन के लिए विस्फोटकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने देश में अमोनियम नाइट्रेट का घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। देश में हाई डेंसिटी अमोनियम नाइट्रेट के चार निर्माता हैं और अमोनियम नाइट्रेट का घरेलू उत्पादन कोयला खनन, गैर-कोयला खनन और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए उपयोग किए जाने वाले विभिन्न प्रकार के विस्फोटकों के निर्माता की आवश्यकता को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए विस्फोटक निर्माता विस्फोटकों के निर्माण के लिए घरेलू और आयातित अमोनियम नाइट्रेट के मिश्रण का उपयोग करते हैं।

वर्तमान में कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के पास विस्फोटकों के लिए 12 घरेलू निजी विस्फोटक निर्माताओं के साथ नियमित अनुबंध हैं। कुछ निजी विस्फोटक निर्माता कंपनियों से भी कोल इंडिया विस्फोट खरीदती है। सीआईएल का थोक विस्फोटकों की आपूर्ति के लिए मेसर्स इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड के साथ दीर्घकालिक अनुबंध है। आठ निजी विस्फोटक कंपनियां एससीसीएल को एसएमई विस्फोटक की आपूर्ति कर रही हैं।

दो हजार करोड़ का विस्फोटक खरीदती हैं कोयला कंपनियां

कोयला कंपनियां विस्फोटक पर सालाना लगभग दो हजार करोड़ खर्च करती हैं। कोयला उत्पादन के अनुसार इसमें उतार-चढ़ाव होता है। सबसे ज्यादा विस्फोटक का उपयोग नार्दन कोलफील्ड लिमिटेड (एनसीएल) में लगभग 1.25 लाख टन के आसपास होता है। बीसीसीएल में सालाना 50 हजार टन विस्फोटक की खपत है। एनसीएल की तरह ही महानदी कोलफील्ड लिमिटेड (एमसीएल) एवं साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (एनसीएल) में भी बड़े पैमाने पर एक्सप्लोसिव का उपयोग किया जाता है। चौथे नंबर पर एक्सप्लोसिव की खपत करनेवाली कंपनी सेंट्रल कोलफील्ड लिमिटेड (सीसीएल) है। बता दें कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनियों को जरूरत का लगभग 50 बारूद की आपूर्ति आईओसीएल से की जाती है। कुछ प्राइवेट कंपनियों से भी बारूद की आपूर्ति होती है।

मुनाफे की दहलीज पर बीसीसीएल

दो दिनी हड़ताल के बाद भी बीसीसीएल ने चालू वित्तीय वर्ष में उत्पादन और डिस्पैच के संशोधित लक्ष्य को हासिल कर लिया है। 32 मिलियन टन से ज्यादा कोयला डिस्पैच अब तक हो चुका है। संकेत यह है कि मामूली ही सही लेकिन इस वित्तीय वर्ष में कंपनी मुनाफे में होगी। आधिकारिक घोषणा बाद में की जाएगी। बीसीसीएल को पहले उत्पादन एवं डिस्पैच का 36 मिलियन टन का लक्ष्य मिला था। बाद में लक्ष्य को संशोधित कर उत्पादन 30 मिलियन टन और डिस्पैच 32 मिलियन टन करने को कहा गया। आधिकारिक सूत्रों ने संकेत दिया कि चालू वित्तीय वर्ष के दो क्वार्टर में कंपनी घाटे में थी। तीसरे क्वार्टर में मुनाफा हुआ है। चौथे क्वार्टर में नतीजे और बेहतर हैं। कंपनी के लिए सबसे फायदेमंद यह है कि कोयले की डिमांड चालू क्वार्टर में बढ़िया रहा और आरआइएनएल जैसी कंपनियों ने बीसीसीएल से अच्छी कीमत पर कोयला लिया है।

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