हजारीबाग में जंगली हाथियों का आतंक, झुंड ने 73 वर्षीय वृद्ध की पटक-पटक कर ली जान; इलाके में फैली दहशत

हजारीबाग जिले में प्रखंड क्षेत्र में लगातार हाथियों के आतंक से ग्रामीण दहशत में हैं। कभी एक हाथी, कभी तीन हाथी तो कभी 14 हाथियों का झुंड गावों में कहर बनकर टूट पड़ते हैं।

शुक्रवार की रात बेड़मक्का के बांझी टोला में तीन घरों को ध्वस्त किया और फसलों को नष्ट किया। वहीं शनिवार को अहले सुबह बेडमक्का जंगल में एक 73 वर्षीय वृद्ध रामेश्वर ठाकुर पिता स्व बुधन ठाकुर को पटक कर मार डाला,  जिससे क्षेत्र में भय का माहौल है।

सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष थे शामिल

झरपो उचका पत्थर टोला निवासी रामेश्वर ठाकुर अहले सुबह 5 बजे बेड़मक्का जंगल, टेकनस, खुखड़ी उठाने गए थे। जंगल में सैकड़ों की संख्या में महिला -पुरुष थे।

अचानक जंगली हाथियों की चिघाड़ सुनकर लोग डरे -सहमें भागने लगे। इसी बीच वृद्ध भी भागने लगा पर वह भाग नहीं सका और हाथियों के झुंड में उन्हें घेरकर सूंड से उठाकर पटक दिया और उसी क्षण उसकी जान निकल गई। हल्ला होते ही ग्रामीण जंगल की ओर दौड़े, तब तक उसकी जान जा चुकी थी।

वन अधिकारी पहुंचे घटना स्थल

वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी सत्येंद्र कुमार चौधरी, वनपाल विद्या भूषण,प्रभारी वनपाल ओम प्रकाश शर्मा,वनरक्षी प्रभात किशोर लकड़ा, टाटीझरिया थाना के ए एस आई प्रमोद कुमार घटना स्थल पर पहुंचे शव को अपने कब्जे में लिया।

मृतक के परिजनों को समझा बुझाकर शांत करवाया।सांसद प्रतिनिधि महेश अग्रवाल और अधिकारियों ने विभाग की ओर से मृतक की पत्नी यशोदा देवी को तत्काल 25 हजार रुपए नकद दिया। उसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

मृतक के दो बेटे हैं,जिनमें एक नारायण ठाकुर कोलकाता ,दूसरा महेंद्र ठाकुर दिल्ली में रहता है। सूचना मिलते ही पोता राहुल शर्मा घटना स्थल पर पहुंचा। उनके साथ सिमराढाब के वार्ड सदस्य सुरेश मुर्मू भी थे।

बांझी टोला में कई घरों को किया ध्वस्त

14 की संख्या में पहुंचे जंगली हाथियों के झुंड ने प्रयाग महतो के घर को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया।उसके बाद रंजीत प्रसाद और विनोद महतो के घर को भी छती पहुंचाया। खेत में लगाए गए मकई और धान के बिचड़े को बर्बाद किया।

इसके पहले सिमराढाब प्राथमिक विद्यालय के कमरे का दरवाजा तोड़ उसमें रखे चावल,आलू को खाए। वहां धनेश्वर मांझी,जीवन मांझी,सोनाराम मांझी,वंशी मांझी,मोतीलाल मांझी, तुलसी मांझी के धान के बिचड़े नष्ट कर दिए।

अब तक तीन लोगों की हाथी ले चुका है जान

बांडी -खंभवा निवासी भरत प्रजापति को जंगली हाथियों ने अपनी फसल की रक्षा करते 1990 में मार दिया था। उसके बाद खैरा के सरयू महतो को आटे की तरह गूंथ कर मौत के घाट उतार दिया था।

घुघलिया की एक वृद्ध महिला को जंगल में बकरी चराने के क्रम में मार दिया था। अब यह चौथी घटना में रामेश्वर ठाकुर को पटक कर मार दिया है।

क्या कहते हैं रेंजर

रेंजर सत्येंद्र कुमार चौधरी ने कहा कि मृतक के परिजन को यथाशीघ्र मुआवजे की राशि दिलवाई जाएगी। हाथियों को भगाने वाली टीम को भी आज ही बुलाया जा रहा है

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